भारतीय रुपये का इतिहास: कौड़ी से ₹1 तक का पूरा सफ़र

History of Indian Rupee: दोस्तों, आज हम जिस ₹1 के सिक्के को बिना सोचे-समझे जेब में डाल लेते हैं, उसका इतिहास इतना पुराना है कि सुनकर सच में मज़ा आ जाएगा। आज का रुपया सीधे ATM से नहीं निकला, बल्कि इसकी जड़ें कौड़ी, दमड़ी और आना जैसे पुराने पैसों में छुपी हुई हैं। इसको आप ऐसे समझ सकते हो… रुपया धीरे-धीरे evolve हुआ है, जैसे मोबाइल phone की पीढ़ियाँ बदलती गई हों।

History of Indian Rupee

सबसे शुरुआत – फूटी कौड़ी और कौड़ी

भारत में सबसे पुराना लेन-देन फूटी कौड़ी और कौड़ी से होता था। ये समुद्री घोंघे जैसे दिखने वाले छोटे shells होते थे। गाँवों में सब्ज़ी, नमक, दूध जैसी चीज़ों का लेन-देन इन्हीं से होता था। उस समय यही “cash” हुआ करता था।

दमड़ी और ढेला – असली सिक्कों की एंट्री

कौड़ी के बाद आया दमड़ी और फिर ढेला। यहाँ से असली metal coins का दौर शुरू हुआ। दमड़ी बहुत छोटी value का coin था, जबकि ढेला उससे बड़ा और ज़्यादा powerful माना जाता था।

पाई और पैसा – आम आदमी का पैसा

फिर आया पाई और उसके बाद पैसा। उस समय रोज़मर्रा की ज़िंदगी में दूध, चाय, मिठाई, सब कुछ पाई-पैसे में खरीदा जाता था। कई जगह आज भी बुज़ुर्ग लोग “दो पैसे की टॉफी” जैसे शब्द बोलते हैं वो यही दौर याद दिलाता है।

आना सिस्टम – जब रुपया 16 हिस्सों में बँटा था

अब कहानी में आता है आना। उस समय पूरा 1 रुपया = 16 आना हुआ करता था।

पुरानी यूनिट रुपये में वैल्यू
1 आना ₹0.0625
4 आना ₹0.25
8 आना ₹0.50
16 आना ₹1

इसी दौर में चार आना और आठ आना के सिक्के बहुत famous थे। आधा रुपया = 8 आना माना जाता था।

1964 के बाद – Decimal सिस्टम की एंट्री

1964 में भारत ने decimal currency system अपनाया। अब 1 रुपया = 100 पैसे हो गया। यही वो बदलाव है जिसने हमारी आज की currency की foundation रखी।

आज का रुपया – छोटा सिक्का, बड़ी कहानी

आज का ₹1 coin छोटा जरूर है, लेकिन इसके पीछे सैकड़ों सालों का सफ़र छुपा है। कौड़ी से लेकर दमड़ी, आना, और फिर decimal system तक हर दौर ने इसे आज के modern रुपये तक पहुँचाया है।

मेरी राय भारतीय रुपये का इतिहास के बारे में

मैं ईमानदारी से कहूँ तो आज हम ₹1 को ignore कर देते हैं, लेकिन कभी सोचो यही छोटा सिक्का भारत की पूरी currency history को represent करता है। यही वो रुपया है जिसने पीढ़ियों का लेन-देन देखा है।

और एक छोटी सी limitation भी है आज digital payments के दौर में, ये सिक्के धीरे-धीरे circulation से गायब हो रहे हैं। शायद आने वाली पीढ़ी सिर्फ किताबों में ही “आना” और “दमड़ी” पढ़ेगी।

आप क्या सोचते हो? क्या cash का दौर हमेशा रहेगा, या future पूरी तरह digital होगा? 🤔

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